Shahjahan History in Hindi: Shahjahan (शाहजहाँ) Mugal मुग़ल काल का एक बहुत ही प्रसिद्ध राजा था और Shahjahan (शाहजहाँ) ने अपने शासन काल में बहुत सारे अच्छे कार्य भी किये थे जिनकी वजह से Shahjahan (शाहजहाँ) बहुत ही अखिक प्रसिद्ध था।

Competitive Exams में Shahjahan (शाहजहाँ) से सम्बंधित प्रश्न हमेशा ही पूछे जाते रहे हैं। इसके साथ ही GK (General Knowledge) की Preparation करने के लिए भी हमें शाहजहाँ के बारे में इन सभी जानकारियों का होना बहुत ही ज्यादा जरुरी होता है। “Shahjahan History”

Shahjahan History in Hindi

Shahjahan (शाहजहाँ) के बारे में इन Points को Study करने के बाद हम Competitive Exams की Preparation भी आसानी से कर सकते हैं।

Shahjahan (शाहजहाँ) के काल को स्थापत्यकला का स्वर्णकाल कहा जाता है क्योंकि Shahjahan (शाहजहाँ) ने अपने शासन काल में बहुत सारे कार्य किये थे।

हम Shahjahan (शाहजहाँ) के बारे में कुछ बहुत ही Important Points को आपके साथ Share कर रहे हैं जिन्हे आप जरूर Read करें जिससे आप अपने Exams में Shahjahan (शाहजहाँ) से सम्बंधित प्रश्नों के सही उत्तर दे कर उत्तीर्ण हो सकते हैं।

Important Shahjahan History in Hindi

जहाँगीर के बाद Shahjahan (शाहजहाँ) सिंहासन पर बैठा था।

जोधपुर के शासक मोटा राजा उदय सिंह पुत्री जगत गोसाई के गर्भ से 5 January, 1592 ई. को खुर्रम (शाहजहाँ) का जन्म लाहौर में हुआ था।

1612 ई. में खुर्रम का विवाह आसफ खां  की पुत्री अर्जुमन्द बानो बेगम से हुआ था, जिसे Shahjahan (शाहजहाँ) ने मलिका-ए-जमानी की उपाधि प्रदान की थी। 1631 ई. में प्रसव पीड़ा के कारण उसकी मृत्यु हो गयी थी।

24 February, 1628 ई. को Shahjahan (शाहजहाँ) आगरे में अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरन-ए-सानी की उपाधि प्राप्तकर सिंहासन पर बैठा था।

Shahjahan (शाहजहाँ) ने आसफ खां को वजीर का पद प्रदान किया था।

इसने नूरजहाँ को दो लाख रू. प्रतिवर्ष की पेंशन देकर लाहौर जाने दिया, जहाँ 1645 ई. में उसकी मृत्यु हो गयी थी।

अपनी बेगम मुमताज महल की याद में Shahjahan (शाहजहाँ) ने ताजमहल का निर्माण आगरे में उसकी कब्र के ऊपर करवाया था।

Shahjahan History

ताजमहल का निर्माण करने वाला मुख्य स्थापत्य कलाकार उस्ताद अहमद लाहौरी था।

मयूर सिंहासन का निर्माण Shahjahan (शाहजहाँ) ने करवाया था। इसका मुख्य कलाकार बे बादल खां था।

Shahjahan (शाहजहाँ) के शासन काल को स्थापत्यकला का स्वर्णयुग कहा जाता है। Shahjahan (शाहजहाँ) द्वारा बनवायी गयी प्रमुख इमारतें हैं- दिल्ली का लालकिला, दीवाने आम, दीवाने ख़ास, दिल्ली जामा मस्जिद, आगरा मोती मस्जिद तथा ताजमहल आदि थे।

Shahjahan (शाहजहाँ) ने 1638 ई. में अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली लाने के लिए यमुना नदी के दाहिने तट पर शाहजानाबाद की नीव डाली थी।

आगरे के जामा मस्जिद का निर्माण Shahjahan (शाहजहाँ) की पुत्री जहाँआरा ने करवाया था।

Shahjahan (शाहजहाँ) के दरबार के प्रमुख चित्रकार मुहम्मद फ़कीर एवं मीर हासिम थे।

शाहजहाँ ने संगीतज्ञ लाल खां को ‘गुण समन्दर‘ की उपाधि दी थी।

Shahjahan (शाहजहाँ) के पुत्रों में दाराशिकोह सर्वाधिक विद्धान था। इनमे भगवद्गीता, योगवशिष्ठ, उपनिष्दों एवं रामायण का अनुवाद फ़ारसी में करवाया था। इसने सर-ए-अकबर (महान रहस्य) नाम से उपनिषदों का अनुवाद करवाया था।

Shahjahan History

शाहजहाँ ने दिल्ली में एक कालेज का निर्माण एवं दारुल बका नामक कालेज की मरम्मत करवाई थी।

शाहजहाँ के पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध 1657 ई. में शुरू हुआ था।

18 June, 1658 ई. को औरंगजेब ने Shahjahan (शाहजहाँ) को बंदी बना लिया था।

25 April, 1658 ई. में दारा एवं औरंगजेब के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में भी दारा की पराजय हुई थी।

सामूगढ़ का युद्ध 8 June 1658 ई. को दारा एवं औरंगजेब के बीच हुआ था इस युद्ध में भी दारा की हार  थी।

उत्तराधिकार का अंतिम युद्ध देवराई की घाटी में 12 से 14 April, 1659 ई. को हुआ था। इस युद्ध में दारा के पराजित होने पर उसे इस्लाम धर्म की अवहेलना करने के अपराध में 30 August, 1659 को हत्या कर दी गयी थी।

शाह बुलंद इकबाल (King of Lofty Fortune) के रूप में दारा शिकोह  जाना जाता है।

आगरे के किले में अपने कैदी जीवन के आठवें वर्ष अर्थात 31 January, 1666 ई. को 74 वर्ष की अवस्था में Shahjahan (शाहजहाँ) की मृत्यु हो गयी थी। Shahjahan History

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