PDF: Bhartiya Samvidhan (Indian Constitution) Current GK- Hindi

Bhartiya Samvidhan- भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) से सम्बंधित प्रश्न Competitive Exams में हमेशा से पूछे जाते रहे हैं। SSC, Bank, Police इत्यादि सभी Competitive Exams में भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) से सम्बंधित 2-4 प्रश्न (Questions) पूछे जाते हैं।

Bhartiya Samvidhan

इस Page में हम भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) अनुछेद तथा जरुरी जानकारी Share कर रहे हैं जो की PDF File में भी उपलब्ध है। आप PDF File को Download करके कभी भी Read कर सकते हैं।

भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) का परिचय

भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) विश्व के सभी गड्तंत्रिक देशों के संविधान से अधिक लम्बा है। भारतीय संविधान के निर्माण के समय इसमें 395 अनुच्छेद, जो की 22 भागों में बनता हुआ था और केवल 8 अनुसूचियाँ थीं परन्तु अब भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) में 465 अनुछेद और 12 अनुसूचियाँ हैं जो की जो की 22 भागों में विभाजित की गयी हैं।

संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद राज्‍यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है।

संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगा जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, राष्‍ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्‍पादन करेगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में “नरेन्द्र मोदी” हैं।

भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) की संरचना

वर्तमान समय में भारतीय संविधान के निम्नलिखित भाग है-

एक उद्देशिका,

448 धाराओं से युक्त 25 भाग,

12 अनुसूचियाँ,

5 अनुलग्नक (appendices), तथा

101 संशोधन।

(अब तक 122 संविधान संशोधन विधेयक संसद मे लाये गये है जिनमे से 101 संविधान संशोधन विधेयक पारित हो चुके है। 8 अगस्त 2016 को संसद ने वस्तु और सेवा कर (GST) पारित कर 101वा संविधान संशोधन किया।

भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) की अनुसूचियाँ

पहली अनुसूची- (अनुच्छेद 1 तथा 4) – राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र का वर्णन।

दूसरी अनुसूची– [अनुच्छेद 59(3), 65(3), 75(6),97, 125,148(3), 158(3),164(5),186 तथा 221] – मुख्य पदाधिकारियों के वेतन-भत्ते

भाग-क : राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन-भत्ते,

भाग-ख : लोकसभा तथा विधानसभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, राज्यसभा तथा विधान परिषद् के सभापति तथा उपसभापति के वेतन-भत्ते,

भाग-ग : उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते,

भाग-घ : भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षकके वेतन-भत्ते।

तीसरी अनुसूची – अनुच्छेद 75(4),99, 124(6),148(2), 164(3),188 और 219- व्यवस्थापिका के सदस्य, मंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, न्यायाधीशों आदि के लिए शपथ लिए जानेवाले प्रतिज्ञान के प्रारूप दिए हैं।

चौथी अनुसूची – अनुच्छेद 4(1),80(2)- राज्यसभा में स्थानों का आबंटन राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों से।

पाँचवी अनुसूची – अनुच्छेद 244(1) – अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जन-जातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित उपबंध।

छठी अनुसूची– अनुच्छेद 244(2), 275(1)- असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के विषय मे उपबंध।

सातवीं अनुसूची – अनुच्छेद 246 – विषयों के वितरण से संबंधित सूची-1 संघ सूची, सूची-2 राज्य सूची, सूची-3 समवर्ती सूची।

आठवीं अनुसूची – अनुच्छेद 344(1), 351 – भाषाएँ – 22 भाषाओं का उल्लेख।

नवीं अनुसूची – अनुच्छेद 31 ख – कुछ भुमि सुधार संबंधी अधिनियमों का विधिमान्य करण।

दसवीं अनुसूची – अनुच्छेद 102(2), 191(2)- दल परिवर्तन संबंधी उपबंध तथा परिवर्तन के आधार पर अ

ग्यारवीं अनुसूची – पन्चायती राज/ जिला पंचायत से सम्बन्धित यह अनुसूची संविधान मे 73वे संवेधानिक संशोधन (1993) द्वारा जोड़ी गई।

बारहवीं अनुसूची – यह अनुसूची संविधान मे 74 वे संवेधानिक संशोधन द्वारा जोड़ी गई।

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भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) की प्रस्तावना 

संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व मे सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है। प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह ‘हम भारत के लोग’ – इस वाक्य से प्रारम्भ होती है।

हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथाउन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिएदृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वाराइस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

भारतीय संविधान (Bhartiya Samvidhan) की प्रस्तावना को पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा 13 December 1946 में पास किया गया था जिसे “अमुख” भी कहा जाता है।

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